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Kankaal (कंकाल)

by Jaishankar Prasad.
Publisher: Vishv Books Private Limited (3 July 2016) Hardcover: 175 pagesISBN: B07CVG3SZ4.
Book Summary: मानव की अतृप्त लालसाओं और यौन विकृतियों का प्रतीक है-कंकाल। जो जीवन के कड़वे सच के रूप में हमारे सामने आ खड़ा होता है। संतान की इच्छुक किशोरी को स्वामी निरंजन की कृपा (?) से पुत्र तो मिला लेकिन पति से दूर रह कर भी मां बन जाने का उसे क्या दंड मिला? दंड के बावजूद वह क्या अपने पुत्र विजय को अपना बना सकी? तारा उर्फ यमुना का कोठे से उद्धार कर मंगल ने उसे अपने बच्चे की मां तो बना दिया लेकिन पत्नी बनाने का साहस न कर सका। विजय और मंगल दोनों ही यमुना, घंटी और माला की तरफ आकर्षित होते रहे, पर कौन किसे पा सका? कथानक के विस्तार और पात्रें की भरमार के बावजूद कथासूत्र कहीं बिखरता नहीं, जो प्रसाद की विशेषता है। मानवीय दुर्बलताओं से भरे पात्रें का चयन और सधी हुई भाषाशैली पाठकों को आकर्षित करती है।


Availability Status ( 1 )

Location Category Status Date due
Sohna Road, GGN
Indian Writing Currently out of library - in circulation 30/11/2018

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